विक्की यादव/रेणुकूट
रेणुकुट। सोनभद्र के क्रिया कुटी आश्रम प्रागण पर भाद्ध पक्ष शुक्ल सप्तमी दिनाक 30.08.25 दिन शनिवार को अघोर गुरु पीठ ब्रहम निष्ठालय बनौरा रायगढ़ छत्तीसगढ़ के अधिष्ठाता औघण सन्त बाबा प्रियदर्शी जी के निर्देशन पर धुमधाम से मनाया गया,क्रिया कुटी व्यस्थापक मन्डल द्धारा बताया गया 12सितंवर सन 1937 को परम पुज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का जन्म आरा जिले के गुंडी ग्राम मे श्री बैजनाथ सिह एव श्रीमती लखराजी देवी जी के घर पर हुआ।

जन्म के समय आप की अद्धत लीला देखकर सब आश्चर्य चकित हुये,जब दाई नार काटने गई तब दाई और दादी माँ ने जटायुक्त बालक को पद्धमासन मुद्रा मे बैठे पाया,पुज्य माताश्री लखराजी देवी ने बालक के मुख मे अलौकिक ज्योतिपुंज देख कर अचंभित हुई।नन्हे बालक की विलक्षण प्रतिभा व दिव्य लीला को देखकर वृद्ध माता पिता बहुत आल्हादित,उन्हे यह आभास होने लगा हमारे घर बालक के रुप मे साक्षात भगवान ही अवतरण लिये है,इसलिये बालक का नाम भगवान सिह रक्खे।आप बनारस मे अघोर दीक्षा लेने के बाद श्मशान से निकल कर समाज,राष्ट व विश्व कल्याण के लिये जन जन से जोड़ने कि अद्भुत युग परिवर्तन का कार्य किया,आप ने समाज मे कुष्ठ रोगियो को अछुत तथा समाज से बहिष्कृत समझे जाने की पीड़ा तथा समाज को ध्वस्त कर रही सबसे बड़ी बुराई नशा के दुष्र्पभाव को बहुत गहराई से महसुस किया,तब आप ने कुष्ठ रोगियो की सेवा और नशाबन्दी का संकल्प लेकर अपने शिष्यो एव अनुयाईयों को समाज सेवा और पुर्ण नशा बन्दी का संकल्प एव आवाहन किया।

आप कुष्ट रोगियो को अपने आश्रम मे रखकर स्वमं अपने हाथो से साफ सफाई मलहम पट्टी व सेवा किया करते,यह मानव सेवा का अद्भुत कार्य आज भी निरंतर जारी है,यह मानव सेवा के अद्धितीय पुनीत कार्य को ग्रीनीज बुक आँफ रिकाँर्ड मै बहुत गौरव व सम्मान के साथ दर्ज किया गया,इसके आलावा भी आश्रम तमाम समाजिक कुरितियो दहेज रहित शादी,शिक्षा चिकित्सा एव तमाम मुलभुत सुविधाओ को अपने सेवा मे स्थान दिया आप एक अलौकिक सन्त थे।

इनके बारे मे कुछ लिख पाना कठिन होता है,कार्यक्रम मे मुख्य रुप से श्री चरण पादुका पुजन,अघोर गुरु गीता पाठ,सफलयोनि पाठ,आरती,भजन कीर्तन के साथ साथ घुघरी हलुआ का प्रसाद वितरण किया गया,कार्यक्रम मे नगर से सैकड़ो की संख्या मे भक्तजन मौजुद रह कर दर्शन पुजन किया।











