संजय चेतन/चोपन
चोपन(सोनभद्र)। पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले चोपन रेलवे जंक्शन को ‘अमृत भारत योजना’ के तहत विश्वस्तरीय बनाने का सपना फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना का काम शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन प्रगति की धीमी चाल ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चोपन स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित समस्याएं प्रमुखता से सामने आई हैं पीने का पानी और साफ सफाई की बात करें तो नल पॉइंट पर इतनी गंदगी है कि बीमारियों को दावत देता नाल पॉइंट, अधूरे प्लेटफॉर्म और शेड, प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 पर निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। कई जगहों पर पुराने शेड हटा दिए गए हैं, लेकिन नए शेड न लगने के कारण यात्रियों को धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है।

सर्कुलेटिंग एरिया में अव्यवस्था: स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग एरिया की खुदाई कर छोड़ दी गई है। गिट्टी और सीमेंट के ढेर लगे होने के कारण ऑटो और निजी वाहनों के आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन गई है। विशेषकर दमा और एलर्जी के मरीजों के लिए स्टेशन पर रुकना दूभर हो रहा है।

यात्रियों की शिकायतें यह है कि
“चोपन एक महत्वपूर्ण जंक्शन है जहाँ से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड के लिए ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन ठेकेदार को कोई फर्क नही पड़ता 2 और 3 नंबर प्लेटफॉर्म पर एक दम से उतरने और चढ़ने की व्यवस्था बहुत ही खराब है जहाँ यात्रियों को चढ़ने उतरने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है ।।










