प्रमोद कुमार/सोनभद्र
सोनभद्र। जिले के रेणुकूट नगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पाँचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य श्री शिवेश शास्त्री जी महाराज द्वारा भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का रसपान कराया गया। कथा का शुभारंभ पूतना वध के प्रसंग से हुआ, जिसने श्रोताओं को यह संदेश दिया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

पूज्य शास्त्री जी ने भावपूर्ण शब्दों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार नंदनंदन ने बाल्यावस्था में ही असुरों का संहार कर धरती को भयमुक्त किया। पूतना वध के प्रसंग में उन्होंने समझाया कि कपट और अहंकार चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, ईश्वर की शरण में आने पर उसका अंत निश्चित है। इसके पश्चात कथा में कालिया मर्दन का अत्यंत रोचक और जीवंत प्रसंग प्रस्तुत किया गया। शास्त्री जी ने बताया कि यमुना नदी को विषमुक्त करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का दमन कर यह संदेश दिया कि प्रकृति और समाज को दूषित करने वाली शक्तियों का नाश करना ही सच्चा धर्म है। इस प्रसंग के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर हो उठे और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथा का विश्राम से पूर्व देवराज इन्द्र के मान-मर्दन के प्रसंग पर प्रकाश डाला । गोवर्धन लीला के माध्यम से पूज्य शास्त्री जी ने समझाया कि अहंकार चाहे देवताओं का ही क्यों न हो, भगवान उसे भी चूर-चूर कर देते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता और मनुष्य को सदैव भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।
पांचवें दिन की कथा में बड़ी संख्या श्रद्धालु हुए उपस्थित
पाँचवें दिन की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजनों, कीर्तन और भगवान के जयघोष से पूरा रेणुकूट क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीकृष्ण की रास लीला एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।










