संजय चेतन/चोपन
सोनभद्र जनपद के चोपन छठ घाट से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जिस पवित्र घाट पर लोग सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, उसी घाट पर एक नवजात शिशु का इस हालत में मिलना मानवता पर गहरा धब्बा बन गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। हर किसी की आंखों में सवाल और दिल में दर्द साफ झलक रहा था। आखिर वह कौन सी मजबूरी या निर्दयता थी, जिसने एक मासूम को इस तरह लावारिस छोड़ने पर मजबूर कर दिया यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की सोच पर गहरा प्रहार है। आधुनिकता और विकास के दावों के बीच आज भी कई जगहों पर बेटियों को लेकर पुरानी कुरीतियाँ जीवित हैं। “वंश चलाने” की संकीर्ण मानसिकता, पितृसत्तात्मक सोच और सामाजिक दबाव आज भी कई परिवारों को ऐसे अमानवीय कदम उठाने के लिए विवश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता के बावजूद बेटियों को ‘बोझ’ समझने की मानसिकता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई मामलों में आर्थिक तंगी, सामाजिक भय और पारिवारिक दबाव भी ऐसी घटनाओं की वजह बनते हैं।प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों की तलाश की जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।










