प्रशांत श्रीवास्तव/दुध्दी
दुद्धी सोनभद्र। सोनभद्र जनपद की दुद्धी तहसील के मझौली गांव से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक घूसखोरी के वीडियो ने राजस्व विभाग की शुचिता और कार्यप्रणाली की कलई खोलकर रख दी है। वीडियो में अंश निर्धारण और पत्थरगड़ी जैसे बेहद सामान्य राजस्व कार्यों के एवज में एक मजबूर काश्तकार (किसान) से सरेआम रिश्वत लेते और नोट गिनते हुए राजस्व कर्मचारियों को देखा जा सकता है। वीडियो के सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए उपजिलाधिकारी (दुद्धी,) निखिल कुमार यादव ने त्वरित संज्ञान लिया। एसडीएम के निर्देश पर मामले की विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।
जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित कानूनगो के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबन की संस्तुति जिलाधिकारी सोनभद्र को भेज दी गई है। वहीं, इस पूरे खेल में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर क्षेत्रीय लेखपाल को भी तत्काल प्रभाव से उसके वर्तमान कार्यक्षेत्र से हटा दिया गया है। इस सख्त एक्शन के बाद तहसील परिसर के अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
किसान ने बताई अपनी आपबीती
पीड़ित किसान ने अपनी जमीन के अंश निर्धारण और पत्थरगड़ी के काम के लिए चक्कर काटे थे, जिसके बदले में अवैध रकम की मांग की गई थी। परेशान होकर पीड़ित ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री/संबंधित शासकीय पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी। शनिवार को तहसील परिसर में किसी उच्चाधिकारी के औचक निरीक्षण की भनक लगते ही, प्रशासन ने आनन-फानन में यह बड़ी कार्रवाई की है। ग्रामीणों में आक्रोश, व्यवस्था पर उठाए सवाल इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और काश्तकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि दुद्धी तहसील में बिना ‘सुविधा शुल्क’ के कोई भी फाइल आगे नहीं सरकती। आम काश्तकारों को अपने ही हक के काम के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तहसील स्तर पर व्यापक स्तर पर पारदर्शिता लाने और भ्रष्ट तंत्र की सफाई करने की मांग तेज कर दी है।









