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सोनभद्र कोर्ट का बड़ा फैसला: दहेज हत्या के मामले में पति, सास और ससुर तीनों को 14-14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा

kishan Pandey (Editor)

By kishan Pandey (Editor)

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प्रशांत श्रीवास्तव/सोनभद्र

विंढमगंज सोनभद्र। सोनभद्र जनपद की एक विशेष अदालत ने दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मृतका के पति, ससुर और सास को दोषी करार देते हुए 14-14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) (सी.ए.डब्ल्यू.), सोनभद्र, विपिन कुमार-III की अदालत द्वारा 10 जुलाई 2026 को सुनाया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और समाज में बढ़ते दहेज उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए दोषियों के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति दिखाने से इनकार कर दिया और उन्हें सख्त से सख्त सजा देने का आदेश दिया।


यहां देखें दोषियों के नाम :
सन्तोष कुमार कुशवाहा (पति) शिव नारायण कुशवाहा (ससुर)
लीलावती देवी (सास) (सभी निवासीगण: ग्राम डूमरा, थाना विंढमगंज, जनपद सोनभद्र, उत्तर प्रदेश) घटनाक्रम के अनुसार, झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत थाना भवनाथपुर के ग्राम भैरोनी निवासी विरेन्द्र मेहता ने अपनी 23 वर्षीय पुत्री पूजा कुमारी की शादी अप्रैल 2019 में सोनभद्र के विंढमगंज थाना अंतर्गत डूमरा गांव निवासी सन्तोष कुमार कुशवाहा के साथ की थी। शादी के कुछ दिनों बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग (पति सन्तोष, ससुर शिव नारायण, सास लीलावती और ननद किरन देवी) पूजा को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। वे लगातार उसके साथ मारपीट, गाली-गलौज करते थे और उसे घर से भी निकाल दिया करते थे। मृतका के पिता ने बताया कि घटना से करीब 15 दिन पूर्व जब वह अपनी बेटी के घर गए थे, तो उसने रोते हुए बताया था कि ससुराल वाले दहेज में एक ऑल्टो कार और दवा की दुकान खोलने के लिए (पांच लाख रुपये) नकद की मांग कर रहे हैं। असमर्थता जताने पर उन्होंने अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

8 अक्टूबर को पता चला, मौत का राज


दिनांक 8 अक्टूबर 2019 की सुबह, विरेन्द्र मेहता को सूचना मिली कि उनकी पुत्री पूजा कुमारी की मौत फांसी पर लटकने के कारण हो गई है। जब वे परिवार सहित मौके पर पहुंचे तो देखा कि उनकी बेटी का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए पंखे के हुक से लटकाया गया था।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जिसमें मृत्यु का कारण स्पष्ट हुआ) के आधार पर तीनों अभियुक्तों को निम्नलिखित धाराओं में दोषी पर हुए सजा सुनाई: धारा 304बी (दहेज हत्या): तीनों दोषियों (सन्तोष, शिव नारायण और लीलावती देवी) को 14-14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा। धारा 498ए (विवाहिता को प्रताड़ित करना): तीनों को 2-2 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000-10,000 का अर्थदंड। अर्थदंड न देने पर 3-3 महीने का अतिरिक्त कारावास। धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम: तीनों को 1-1 वर्ष के साधारण कारावास और ₹5,000-5,000 का अर्थदंड। अर्थदंड न देने पर 2-2 महीने का अतिरिक्त कारावास। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अभियुक्तों को धारा 302/34 के वैकल्पिक आरोपों से दोषमुक्त किया गया है और इनकी सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई पूर्व की अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।)
फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश विपिन कुमार-III ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की कुप्रथा पर बेहद तल्ख टिप्पणी की।

अदालत ने कहा:


“दोषियों द्वारा घर की बहू, जो कि एक बच्चे की मां भी थी, को दहेज के लिए प्रताड़ित करते हुए दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई। दोषियों द्वारा कारित अपराध जघन्य प्रकृति का है। दहेज की मांग ने अभियुक्तगण को अमानुष बना दिया है। ऐसे में दोषियों के साथ सहानुभूति दिखाना कतई उचित नहीं है, उन्हें ऐसी सजा दी जानी आवश्यक है जिससे समाज में एक अच्छा संदेश जाए।” अदालत के आदेश के बाद तीनों दोषियों का दोषसिद्धि वारंट तैयार कर उन्हें सजा भुगतने के लिए तत्काल जिला कारागार, सोनभद्र भेज दिया गया है।

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kishan Pandey (Editor)

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किशन पाण्डेय प्रयागराज से ताल्लुक रखते हैं और जनपद सोनभद्र में 15 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में है ये स्थानीय समाचारों के अलावा राजनीतिक व मनोरंजन जैसी खबरों में रूचि रखते हैं। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य ' हर ख़बरों ' को जनता तक पहुंचाने का कार्य कर रहा हैं।

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