उमेश सागर/शक्तिनगर
शक्तिनगर,सोनभद्र। एनटीपीसी सिंगरौली परियोजना के तृतीय चरण विस्तार में स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने से उनमें भारी असंतोष है। आरोप है कि परियोजना में अन्य राज्यों से श्रमिकों को लाकर काम कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को हाशिए पर रखा जा रहा है।यह मामला एनटीपीसी सिंगरौली परियोजना के तृतीय चरण 2×800 मेगावाट विस्तार से संबंधित है, जहां एक नया पावर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना का कार्य भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) को आवंटित किया गया है, जिसे पावर प्लांट निर्माण के लिए पर्याप्त मजदूरों की आवश्यकता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीएचईएल और एनटीपीसी सिंगरौली परियोजना द्वारा शक्तिनगर के परियोजना प्रभावित युवाओं की अनदेखी की जा रही है। इसके बजाय, छोटे-छोटे समूहों में बाहर से श्रमिकों को लाकर संविदा कंपनियों के माध्यम से भर्ती किया जा रहा है। इस भेदभावपूर्ण व्यवहार से स्थानीय युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है।सोनभद्र जैसे जिले में, जहां बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, बाहरी लोगों को आउटसोर्सिंग के जरिए नौकरी देना स्थानीय युवाओं के लिए चिंता का विषय है। विस्थापन के कारण सोनभद्र के लोग पहले ही अपनी संस्कृति, सभ्यता और भूमि से कई बार वंचित हो चुके हैं, और अब बेरोजगारी उनकी स्थिति को और खराब कर रही है।परिक्षेत्र में व्याप्त बेरोजगारी और असंतोष के कारण क्लेश और तनाव का माहौल है। यह आशंका व्यक्त की गई है कि यदि इन युवाओं को समय रहते मुख्यधारा में नहीं जोड़ा गया, तो वे अपनी मूल विचारधारा से भटक सकते हैं। सोनभद्र एक ऐसा जिला है जो पहले नक्सलवाद से प्रभावित रहा है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से हिंसा में कमी आई है। औद्योगिक परियोजनाओं द्वारा स्थानीय लोगों के बीच विवाद पैदा करना समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। इस गंभीर समस्या पर तत्काल विचार कर उचित निर्णय लेने का आग्रह किया गया है। इस संबंध में मंडलायुक्त मिर्जापुर मंडल, जिलाधिकारी सोनभद्र, निदेशक मानव संसाधन एनटीपीसी लिमिटेड, सांसद रॉबर्ट्सगंज, विधायक दुद्धी विधानसभा और महाप्रबंधक बीएचईएल शक्तिनगर को भी प्रतिलिपि भेजी गई है।











