म्योरपुर राजाराम
सोनभद्र। म्योरपुर बनवासी सेवा आश्रम गोविंदपुर उत्तर प्रदेश की संस्थापिका डा. रागिनी प्रेम ने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी महिलाओं और बच्चों की सेवा तथा उनके सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराईं। वे 25 से अधिक वर्षों से ग्रामीण आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उनके योगदान से 400 गाँवों की 10,000 से अधिक आदिवासी महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं। 1957 में एम.बी.बी.एस. और 1964 में एम.डी. (Osmania University) करने के बाद उन्होंने लगातार अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाने का प्रयास किया, ताकि समाज के उत्थान में योगदान दे सकें।

1968 में, अपने पति प्रेमभाई के साथ मिलकर उन्होंने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बनवासी सेवा आश्रम की स्थापना की। उन्होंने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देकर प्राथमिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और उचित पोषण का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कई सामान्य बीमारियों के उपचार में घरेलू नुस्खों के साथ आधुनिक दवाओं का भी उपयोग किया। डा. रागिनी प्रेम ने छोटे पुस्तिकाओं के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण और साक्षरता के बारे में शिक्षित किया। उन्होंने कई कुटीर उद्योग भी शुरू किए – साबुन बनाना, कागज़ बनाना, मधुमक्खी पालन आदि।
डा. रागिनी प्रेम निश्चित रूप से ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में अपने समर्पित कार्य के लिए पहचान और प्रोत्साहन की पात्र रहीं हैं।











