विकास दत्त मिश्रा/वाराणसी
बड़ागांव/वाराणसी। क्षेत्र में पशुओं को घातक लंपी स्किन रोग से सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग ने व्यापक टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। अभियान के तहत बड़ागांव विकासखंड मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल की चिकित्सीय टीम ने ग्राम पचरासी और करमपुर में घर-घर पशुपालकों के यहां जाकर लगभग 500 मवेशियों का टीकाकरण किया। इस दौरान बीमार पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं भी वितरित की गईं।
अभियान का नेतृत्व पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष सिंह और 1962 एंबुलेंस सेवा के चिकित्सक डॉ. सूरज वर्मा, पशुधन प्रसार अधिकारी विजय कुमार, सेवानिवृत्ति फार्मासिस्ट आर पी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। चिकित्सकों की टीम ने घर-घर जाकर स्वस्थ गोवंश को टीके लगाए और पशुपालकों को इस संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूक किया।
डॉ. आशीष सिंह ने गांव में जगह-जगह एकत्र पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि लंपी एक बेहद संक्रामक और जानलेवा विषाणुजनित बीमारी है। यदि समय रहते इसका उपचार और बचाव न किया जाए, तो पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि संक्रमित पशु को पूरी तरह स्वस्थ होने में लगभग एक माह का समय लगता है, जिससे देखभाल व इलाज का खर्च बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी पशु में बीमारी के लक्षण दिखते ही उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग (आइसोलेट) कर देना चाहिए।
चिकित्सकों ने पशुपालकों को सलाह दी कि वे पशुशाला और उसके आसपास नियमित साफ-सफाई रखें तथा मक्खी-मच्छर व किलनी से बचाव के पुख्ता उपाय करें, क्योंकि ये संक्रमण फैलाने के मुख्य वाहक हैं। मवेशियों के शरीर पर गांठ, तेज बुखार, लार गिरना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय या 1962 हेल्पलाइन पर संपर्क करें। समय से टीकाकरण ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी साधन है।











