रामप्रवेश गुप्ता/बीजपुर
एनटीपीसी परिसर में प्रसव पीड़ा से कराहती रही महिला, समय पर मदद न मिलने का परिजनों ने लगाया आरोप
बीजपुर (सोनभद्र) एनटीपीसी रिहंद परिसर में गुरुवार सुबह उस समय स्वास्थ्य एवं आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए, जब प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को कथित तौर पर समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी और उसने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस के लिए लगातार फोन करने के बावजूद करीब एक घंटे तक मदद नहीं पहुंची। बाद में एक एनटीपीसी कर्मी की पहल पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची, जिसके बाद प्रसूता और नवजात को धन्वंतरी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जानकारी के अनुसार, डोडहर निवासी अर्जुन की पत्नी रेशमा गुरुवार सुबह अपने मायके से बस से लौट रही थी। करीब नौ बजे रास्ते में अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजन उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रास्ते में उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया।
परिजनों के मुताबिक, काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसी दौरान प्रसूता की हालत और बिगड़ गई और उसने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद भी महिला और नवजात की स्थिति को देखते हुए परिजन मदद के लिए लगातार गुहार लगाते रहे। करीब एक घंटे बाद एक एनटीपीसी कर्मी की पहल पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची। इसके बाद दोनों को एनटीपीसी के धन्वंतरी अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान एनटीपीसी के कई अधिकारी और कर्मचारी इसी मार्ग से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने मौके पर रुककर महिला की स्थिति जानने अथवा तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की पहल नहीं की। घटना को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में नाराजगी देखी गई।
परिवार का यह भी आरोप है कि एनटीपीसी परिसर और अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच को लेकर उन्हें पहले भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, एंबुलेंस में देरी के वास्तविक कारण और उस समय की आपातकालीन व्यवस्था को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब महिला एनटीपीसी परिसर के भीतर थी और धन्वंतरी अस्पताल की दूरी भी कथित तौर पर डेढ़ किलोमीटर से कम बताई जा रही है, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस को पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? यदि परिजनों द्वारा लगातार सूचना दी जा रही थी तो तत्काल चिकित्सा सहायता क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा सकी?











