उदय चंद गुर्जर बीजपुर
बीजपुर/सोनभद्र: नमामि गंगे योजना के तहत चल रही झीलों-बिजपुर पेयजल परियोजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। निजी संस्था पर सुरक्षा कर्मियों का शोषण करने और शिकायत दबाने के लिए सहमति पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर करने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
जनपद में नमामि गंगे योजना के अन्तर्गत ग्रामीण अंचलों में पेयजल आपूर्ति का कार्य जी.वी.पी.आर. एजेंसी के अधीन चल रहा है। कार्यस्थल की देख-रेख का जिम्मा ‘हारनिया मैनेजमेंट सॉल्यूशन’ नामक एजेंसी को मिला है।
आरोप है कि हारनिया एजेंसी के अधीन झीलों-बीजपुर परियोजना के विभिन्न कार्यस्थलों पर तैनात लगभग 45 से 50 सुरक्षा गार्डों से श्रम कानूनों को ताक पर रखकर प्रतिदिन 12 घंटे काम लिया जा रहा है। इसके बदले मनमाना मानदेय दिया जा रहा है।
गार्डों ने किया था कार्य बहिष्कार
शोषण से तंग आकर सभी सुरक्षा कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन की मांग करते हुए विभिन्न विभागों में पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी।

फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत निस्तारण की साजिश
सुरक्षा कर्मियों का आरोप है कि उनकी मांगें पूरी करने के बजाय कंपनी ने एक ‘सहमति पत्र’ तैयार कर लिया। इस पत्र पर लगभग सभी सुरक्षा कर्मियों के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए गए। इसके जरिए शासन स्तर पर की गई शिकायतों का फर्जी निस्तारण दिखाने की साजिश रची गई।
पुलिस में शिकायत, दो हफ्ते बाद भी कार्रवाई नहीं
फर्जीवाड़े की भनक लगते ही सुरक्षा कर्मी सहमति पत्र की कॉपी लेकर बभनी थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद गार्डों ने क्षेत्राधिकारी दुद्धी को लिखित पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल: क्या इन कर्मचारियों को न्याय मिलेगा या शोषण की यह शिकायत भी अधिकारियों की टेबल के नीचे दबकर रह जाएगी?










