_धोखाधड़ी मामले में दंपती के विरुद्ध एफआईआर का आदेश 5.75 लाख रुपये गबन करने का आरोप, एसीजेएम कोर्ट ने अनपरा थानाध्यक्ष को विवेचना के दिए निर्देश

सोनभद्र। धोखाधड़ी कर 5 लाख 75 हजार रुपये गबन किए जाने के आरोप के मामले में अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन/एसीजेएम सोनभद्र अजय सिंह की अदालत ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए दंपती के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने अनपरा थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना करने तथा की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश सिरसोती नकटू, थाना बीजपुर निवासी पंकज कुमार सिंह की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल के माध्यम से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया। प्रार्थना पत्र में पंकज कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व परिचित आकाश कुमार सिंह और उनकी पत्नी श्वेता सिंह निवासी चेतवा, थाना बीजपुर उनके घर आए थे। आरोप है कि श्वेता सिंह ने स्वयं को सिटी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड की अनपरा औड़ी मोड़ शाखा का एजेंट बताते हुए चार वर्ष की आरडी कराने की बात कही। इसके तहत 10 हजार रुपये प्रतिमाह जमा करने पर चार वर्ष बाद 6 लाख 10 हजार 800 रुपये मिलने का भरोसा दिलाया गया। आरोप के मुताबिक, 31 जुलाई 2021 को 10 हजार रुपये नगद देकर आरडी कराई गई और अनपरा स्थित शाखा कार्यालय में कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद 11 अगस्त 2021 को तीन वर्ष की एफडी के लिए दो लाख रुपये का चेक दिया गया, जिसे आकाश कुमार सिंह द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की बभनी शाखा से प्राप्त किया गया। आरोप है कि तीन वर्ष बाद 2 लाख 81 हजार रुपये भुगतान का आश्वासन दिया गया था। प्रार्थना पत्र के अनुसार, निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब रुपये के भुगतान की मांग की गई तो पहले जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में कथित तौर पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। आरोप है कि अब कंपनी बंद होने की बात कहकर रकम वापस करने से इनकार किया जा रहा है। पंकज कुमार सिंह का कहना है कि मामले की शिकायत अनपरा थाने में की गई, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया, वहां से भी कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली गई। मामले में अनपरा थाने से प्रस्तुत रिपोर्ट और अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए अनपरा थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया। साथ ही न्यायालय ने की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।












