प्रशांत श्रीवास्तव/दुध्दी
दुद्धी (सोनभद्र)। तहसील प्रांगण में चल रही सुप्रसिद्ध रामलीला में शनिवार की रात बाली पुत्र अंगद और लंकापति रावण के बीच हुए तीखे और नीतिपूर्ण संवाद का सजीव मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय और बुलंद संवाद अदायगी ने परिसर में मौजूद सैकड़ों दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि प्रभु श्री राम युद्ध से पूर्व शांति की अंतिम कोशिश के रूप में बाली पुत्र अंगद को अपना दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं। अंगद ने रावण को पूर्ण नीति-अनीति का बोध कराते हुए सम्मान सहित माता सीता को लौटाने और प्रभु श्री राम की शरण में जाकर क्षमा मांगने की सलाह दी।
घमंड में चूर रावण ने दी युद्ध की धमकी अंगद के शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए अहंकार में डूबे रावण ने प्रभु श्री राम को युद्ध की चुनौती दे डाली और बौखलाकर अपने सैनिकों को अंगद को बंदी बनाने का आदेश दिया। इस पर अंगद ने मुस्कुराते हुए रावण की सभा में मौजूद सभी योद्धाओं को ललकारा और कहा— “मैं उसी बाली का पुत्र हूँ, जिसने तुम्हें छह महीने तक अपनी कांख (बांह) में दबाकर रखा था। यदि तुम्हारी लंका का कोई भी शूरवीर मेरा एक पैर भी जमीन से उखाड़ दे, तो मैं हार मानकर वापस लौट जाऊँगा।” इसके बाद रावण के दरबार के एक से बढ़कर एक शक्तिशाली योद्धाओं ने अंगद का पैर उठाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन कोई भी उनके पैर को टस से मस नहीं कर सका।
इस दृश्य के जीवंत प्रदर्शन पर पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। कला और मार्गदर्शन का अद्भुत संगम
रामलीला को सफल और भव्य बनाने में पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा: महंत: पंडित देवेंद्र मिश्र डायरेक्टर: सुरेंद्र मिश्र मैनेजर: कमलेश सिंह ‘कमल’
विशेष मार्गदर्शन व नेतृत्व: हरिहर प्रसाद बाबा आयोजन समिति के कुशल प्रबंधन और कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय की बदौलत रामलीला का यह मंचन दर्शकों के दिलो-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ रहा है।












