राजाराम/म्योरपुर
• रासपहरी-चढ़ाई कुंडाडीह में जुटे जनप्रतिनिधि और समाज के लोग, परंपरा व विरासत को पीढ़ियों तक सहेजने का आह्वान
म्योरपुर। सोनभद्र जिले के म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत रासपहरी-चढ़ाई कुंडाडीह के समीप जंगल किनारे मुख्य मार्ग के बगल में आदिवासी समाज ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक करमडार पूजा पर्व श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया। आदिवासी मूलनिवासी महासभा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर आदिवासी विरासत के संरक्षण तथा अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि करम पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, आस्था और सांस्कृतिक अस्मिता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पूर्वजों से मिली विरासत से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। वक्ताओं ने आह्वान किया कि आदिवासी समाज अपनी समृद्ध संस्कृति को संरक्षित रखे और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास करे।
जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में सोनभद्र के सांसद छोटेलाल खरवार, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री संजीव गोंड़, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार, पूर्व विधायक हरिराम चेरो, पूर्व विधायक रामदुलार गोंड़, म्योरपुर ब्लॉक प्रमुख मानसिंह गोंड़ तथा समाजसेवी एवं बीएसपी प्रभारी संजय सिंह गौड़ धुर्वे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा भाजपा जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष मोहनलाल खरवार, कार्यक्रम संरक्षक उमाशंकर सिंह उर्फ बबाई सिंह गोंड़, कार्यक्रम संयोजक जय मंगल सिंह उरेती, रासपहरी की पूर्व प्रधान सुरतन देवी, दुद्धी सहकारी बैंक के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह गोंड़, जिला पंचायत सदस्य जनकधारी, अमरेश तिवारी और नरेंद्र सिंह गौड़ सहित अन्य गणमान्य लोग तथा आयोजन समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
संस्कृति बचाने के लिए एकजुटता का संदेश
आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक मान्यताओं और सामाजिक सहयोग की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी पुरातन परंपराओं को भूलना नहीं चाहिए। समाज की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि युवा पीढ़ी भी ऐसे आयोजनों से जुड़े और अपनी विरासत के महत्व को समझे।
करमडार पूजा के आयोजन ने आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव को सामने रखते हुए यह संदेश दिया कि अपनी परंपराओं का सम्मान और संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का सशक्त माध्यम है।












