सोनभद्र ब्यूरो कार्यालय
करवाचौथ का दिन हर सुहागन के लिए बेहद खास होता है, जब सजना-संवरना, सोलह शृंगार और चांद की पूजा के साथ पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। इस दिन घर-घर में सजी पूजा की थाली, सजी-धजी महिलाएं और प्रेम से भरे पल देखने को मिलते हैं। लेकिन जितनी अहमियत श्रृंगार और साज-सज्जा की होती है, उतनी ही पूजा की थाली में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों की भी होती है। अगर आप भी करवाचौथ की तैयारी कर रही हैं, तो जानना जरूरी है कि पूजा में किस धातु के बर्तनों का उपयोग सही माना जाता है और किन से परहेज करना चाहिए।
लोहे और स्टील के बर्तन का नहीं करें इस्तेमाल
करवाचौथ की पूजा में लोहे या स्टील के बर्तन इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। लोहा ऐसी धातु है जो हवा और पानी के संपर्क में आने से जल्दी जंग खा जाती है। यही वजह है कि किसी भी पूजा-पाठ में लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। वहीं स्टील को भी नेचुरल मेटल ना होने के कारण पूजा-पाठ में वर्जित माना गया है। क्योंकि मिलावट से तैयार होने की वजह से ये मेटल शुद्ध नहीं माना जाता है।
एल्युमीनियम के बर्तनों से भी बनाएं दूरी
एल्युमीनियम भले ही हल्का और सस्ता विकल्प हो, लेकिन इसे पूजा में इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जाता। इस मेटल में समय के साथ कालापन जमा होने लगता है। यही वजह है कि करवाचौथ जैसे शुभ मौके पर एल्युमीनियम की थाली या कलश का उपयोग करने से बचना ही बेहतर है।
तांबा और पीतल लाते हैं शुभता
अगर आप चाहते हैं कि आपकी करवाचौथ पूजा शुद्धता और सौभाग्य से भरी हो, तो तांबे और पीतल के बर्तन इस्तेमाल करें। तांबा सदियों से शुद्धता और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है। तांबे के बर्तन में रखा जल भी एनर्जी से भरपूर माना जाता है। वहीं, पीतल के बर्तन भी शुभ माने जाते हैं और इन्हें पूजा में इस्तेमाल करने से वातावरण में पॉजिटिविटी और पवित्रता बढ़ती है।
सोना और चांदी सबसे श्रेष्ठ धातुएं
करवाचौथ की पूजा में अगर आपके पास सोना या चांदी के बर्तन हैं, तो उनका उपयोग सबसे उत्तम माना जाता है। सोना और चांदी दोनों ही धातुएं पवित्रता, समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक हैं। इनसे बनी पूजा थाली और दीपक ना सिर्फ देखने में सुंदर लगते हैं बल्कि आपके आयोजन को और अधिक पारंपरिक और अट्रैक्टिव बनाते हैं।










