
ब्यूरो कार्यालय देवघर
- श्रावणी मेला 11 जुलाई से शुरू
- रविवार-सोमवार को शीर्षदर्शनम बंद
- अरघा से होगा बाबा का जलाभिषेक
देवघर। श्रावणी मेला 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। परंपरा के अनुसार मेले से ठीक पहले जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच एक दूसरे से समन्वय स्थापित करने के लिए बैठक होती है। शुक्रवार की देर शाम हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि श्रावणी मेला के दौरान रविवार और सोमवार को शीर्षदर्शनम की सुविधा बंद रहेगी। ताकि आम श्रद्धालु आसानी से दर्शन और पूजा कर सकें।
कूपन की दर जल्द ही तय की जाएगी
शीर्षदर्शनम कूपन की दर जल्द ही तय की जाएगी। मेले के दौरान एक माह तक स्पर्श पूजा बंद रहेगी और श्रद्धालु अरघा के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण करेंगे। बैठक के बाद उपायुक्त नमन प्रियश लकड़ा ने बताया कि श्रावणी मेला के दौरान रविवार और सोमवार को शीर्षदर्शनम की सुविधा बंद रहेगी। बैठक मंदिर स्थित प्रशासनिक भवन में बेहतर माहौल में हुई।
बैठक की अध्यक्ष डॉ सुरेश भारद्वाज ने की
बैठक की अध्यक्षता पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ सुरेश भारद्वाज ने की। डीसी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का इंतजार पूरे देवघर वासी करते हैं। तीर्थ पुरोहित समाज और जिला प्रशासन के बीच सामंजस्य स्थापित कर मेले का सफल संचालन किया जाएगा।
नई व्यवस्था लागू की गई है क्षमता अभी कम है होगी परेशानी
डीसी ने कहा कि पुरोहित समाज एक परिवार की तरह है। जिनका योगदान श्रावणी मेला के प्रबंधन में अहम है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। पहले तीन हजार श्रद्धालु दिनभर में शीरदर्शनम से पूजा-अर्चना करते थे। आज सात हजार से अधिक श्रद्धालु कूपन के माध्यम से पूजा-अर्चना करते हैं। नई व्यवस्था लागू की गई है। क्षमता अभी कम है। अधिक लोगों के आने से उन्हें परेशानी होगी। इसलिए इसमें और सुधार की जरूरत है। इससे पूर्व एसडीओ सह मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने कहा कि श्रावणी और भादो मेले के दौरान बाबा मंदिर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुरोहित समाज और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने श्रावणी मेला और भादो मेले में अरघा लगाने की बात कही।
मंदिर के पट खुलने व बंद होने का समय निर्धारित किया जाए
लेकिन भादो में अरघा लगाने पर सहमति नहीं बन पाई। पंडा धर्मरक्षिणी सभा के महासचिव निर्मल झा ने डीसी व एसपी के समक्ष मांग रखी कि मंदिर के पट खुलने व बंद होने का समय निर्धारित किया जाए। साथ ही श्रीदर्शनम की अव्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। वहीं पुजारियों ने कहा कि बाबा मंदिर की परंपरा को ध्यान में रखते हुए रात नौ बजे तक पट बंद कर देना चाहिए। बैठक में पूर्व महासचिव दुर्लभ मिश्रा ने परंपरा पर चर्चा की।











