विकास दत्त मिश्रा वाराणसी
23 शोध-पत्रों का हुआ वाचन, ग्रामीण विकास और तकनीक पर हुई विस्तृत चर्चा
बाबतपुर/वाराणसी। श्री बलदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़ागाँव के भूगोल विभाग और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। “मानव संसाधन विकास की प्रगति में भूगोल का योगदान – चुनौतियां एवं अवसर : विकसित भारत @2047” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी के दूसरे दिन देश भर से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने अपने विचार और शोध प्रस्तुत किए। 23 शोध-पत्रों का हुआ प्रस्तुतीकरण: संगोष्ठी के संयोजक और भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. उमा कांत सिंह ने दूसरे दिन की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों द्वारा कुल 23 शोध-पत्रों का वाचन किया गया। इन शोध पत्रों में मुख्य रूप से स्मार्ट सिटी, जलवायु परिवर्तन, प्रवास (Migration), और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी भौगोलिक चुनौतियों पर व्यावहारिक चर्चा की गई। विशिष्ट सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय (U.P. College), वाराणसी के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि 2047 के ‘विकसित भारत’ का सपना तभी पूरा होगा जब हमारे अकादमिक शोध का सीधा लाभ खेतों में काम करने वाले किसान और गांव के आम युवाओं तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि भूगोल विषय हमें हमारी मिट्टी और स्थानीय संसाधनों से जुड़ना सिखाता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU) के सामाजिक विज्ञान विद्याशाखा के प्रभारी प्रो. संजय कुमार सिंह ने बताया कि आधुनिक भौगोलिक तकनीकों जैसे जीआईएस (GIS) और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को विश्व स्तर के लिए तैयार किया जा सकता है। सत्र की अध्यक्षता कर रहे मलिकपुरा पी.जी. कॉलेज, गाजीपुर के प्राचार्य डॉ. दिवाकर सिंह ने श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल में इस स्तर के अकादमिक आयोजन से स्थानीय विद्यार्थियों को नई दिशा मिलेगी। शोधार्थियों को अपनी क्षेत्रीय समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। प्रथम सत्र में पहला शोध पत्र शौर्य सिंह द्वारा जियोस्पासिल नेक्सस 2047 प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन: महाविद्यालय के डा उमा कान्त सिंह व डा सच्चिदानंद मौर्य ने सभी मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत व सम्मान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. राकेश्वरी प्रसाद ने किया।इस अवसर पर डॉ. अखिलेश कुमार सिंह, प्रो. आनंद प्रकाश, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. आलोक चौबे सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।










