प्रशांत श्रीवास्तव/सोनभद्र
सोनभद्र: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार का इंश्योरेंस क्लेम झूठे तथ्यों का हवाला देकर खारिज करने वाली ‘एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी’ को आखिरकार झुकना पड़ा है। सोनभद्र की स्थायी लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद कोर्ट ने बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को (चौदह लाख नब्बे हजार रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया है। वाराणसी के नारायणपुर (नैपुरा खुर्द) निवासी उमेश राय (पुत्र उदय नरायण राय) ने अपनी वैगनआर कार का इंश्योरेंस एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था, जिसमें ₹15 लाख का पर्सनल एक्सीडेंट कवर भी शामिल था। 29 जून 2024 को उमेश राय अपनी ड्यूटी से पुलिस लाइन लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में आई गंभीर चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद सोनभद्र के दुद्धी सरकारी अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम कराया गया था।
15 लाख के लिए किया आवेदन, फिर क्या हुआ जाने
मृतक की पत्नी नीलम राय ने जब बीमा कंपनी में ₹15 लाख के क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने टालमटोल शुरू कर दी। सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज (वैध ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के कागजात) स्पीड पोस्ट द्वारा भेजे जाने के बावजूद, बीमा कंपनी ने 27 जनवरी 2025 को “झूठे तथ्यों” का आरोप लगाते हुए क्लेम को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
इसके खिलाफ पीड़ित पत्नी नीलम राय और उनके दो बेटों (अभिषेक राय व आकाश राय) ने कोर्ट की शरण ली और न्याय की गुहार लगाई।मामला सोनभद्र की स्थायी लोक अदालत के सामने आया। कोर्ट की मध्यस्थता और कानूनी कार्यवाही के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और 7 मार्च 2026 को एक समझौता दाखिल किया गया।
ताजा आदेश के अनुसार, लोक अदालत के चेयरमैन नरेंद्र बहादुर प्रसाद और सदस्य नीरज कुमार सिंह व आशीष कुमार मिश्रा ने इस समझौते के आधार पर याचिका को निस्तारित कर दिया है। तय समझौते के तहत कुल ₹14,90,000 की राशि परिवार के सदस्यों के बीच इस तरह बांटी जाएगी:
नीलम राय (पत्नी, उम्र 50 वर्ष): ₹10,00,000 (दस लाख रुपये)
अभिषेक राय (पुत्र, उम्र 27 वर्ष): ₹2,45,000 (दो लाख पैंतालीस हजार रुपये)
आकाश राय (पुत्र, उम्र 25 वर्ष): ₹2,45,000 (दो लाख पैंतालीस हजार रुपये)
कोर्ट ने प्रतिवादी बीमा कंपनी को जल्द से जल्द इस राशि का भुगतान करने का कड़ा निर्देश दिया है, जिससे पीड़ित परिवार को करीब दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिल सका है।











